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गजल :- बटे तिनकों में टूट के हम यहां तेरी हुकूमत में
बहर:-1222 1222 1222 1222
रदीफ़ :- में
काफिया :- अत

बडे़ देखे नजारे हैं यहां तेरी सियासत में
सभी लूटा के बैठे हैं विचारों की बगावत में

जरा देखो हमारी जां कहां से जाके लौटी है
बटे तिनकों में टूट के हम यहां तेरी हुकूमत में

लगे पतझड का ही मौसम बरसता झूमता सावन
बदलते हैं सभी फिदरत यहां तेरी खिलाफत में

चलों मानो हुईं हैं तो बड़ी ही तुम से गुस्ताखी
सभी सहमे हुए से हैं यहां तेरी हिमाकत में

अभी करना नहीं कोई अदब की तुम बड़ी बाते
गुजारे हैं सभी ने दिन यहां तेरी शिकायत में

सत्यधर बान्धे
बेमेतरा छत्तीसगढ़
दिनांक :- 11.04.19

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