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पाके नर तन तू अगर

पाके नर तन तू अगर.... ताल -रूपक पाके नर तन तू अगर बिसरा गये भगवान को दुनियाबी मस्ति में आकर भुल गये येह शान को । पद तुमको चौरासी के बंधन से छुड़े के नर तन जो दिया तू मिलादी मिट्टी में मूरख तू अपने आन को पाके नर तन तू अगर.... पद- भटका खाकर आये हो, वे याद तुमको है नहीं...

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गयल में भेट भइले ना

गयल में भेट भइले ना ताल, -दादरा सखि कान्हां हमार अलबेले गयल में भेंट भइले ना नहीं साथ में न उनके चेले गयल में भेंट भइले ना पद आंचल पकड़ मोहे पूछत कान्हां पूछत कान्हां हां पूछत कान्हा कहां राधा गयो है मेरो गयल में भेंट भइले ना पद मैं बोली अजी छोंड़ अंचरवा छोड़ अंचरवा हां...

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मन जग फूलवरिया में

मन जग फूलवरिया में ताल-दादरा मुखड़ा- मन जग फूलवरिया में भंवरा क्यों बन गया है नहीं सोंचता तू आगे गवांरा क्यों बन गया है ।। मन जग फूलवरियां में... पद 1- है कितने रंग बिरंगे कलियों में गुल खिले हैं पी-पी के रस तुम आते बगियां खूब झूमे हैं होगी कभी ये पतझड़ बहरा क्यों बन...

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तारासीरा पाठीकपीठा

(जन गीत) “तारासीरा पाठीकपीठा” -----------------  तारासीरा पाठीकपीठा धरारपटा रेंगयं कड़बिड़कईया सुदूर बुदूर अपने-अपन गोठियावयं ॥   गुंटूर-गुंटूर, गुंटूर-गुंटूर नोनी  बाबू पढयं भसर-भसर, भसर-भसर बोदेला टूरा सोवय ॥   तनानना-तनानना लेड़गी टूरी रहय घेरीबेरी-घेरीबेरी दाई के...

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मितान”

(मातृभूमि के लिए किसान का आह्वान करता यह गीत) “मितान” -------------------  -सुनवसुनव ग मोर मितान  आवव आवव हो मोर मितान  देखव देखव ग मोर मितान  छत्तीसगढ़िया बनिहार किसान ||   ए माटी ए माटी ए चोवा चंदन मनखे करथे एला बंदन  जघा-जघा मा मंदिर देवाला   किसम –किसम के भाजी...

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बन्दौं छत्तीसगढ़ मईया

लोक गीत भोजली धुन में” -------------------                         - बन्दौं छत्तीसगढ़ मईया -------मईया  मईया छत्तीसगढ़ के पइयाँ लागौं मैं जी  हो पइयाँ लागौं मैं जी  हाथ जोरे बिनती मोरे  तुंहला भावौं मैं जी  बन्दौं छत्तीसगढ़ मईया   • राजिम रतनपुर अउ  सबरी नरायन हो सबरी...

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मोर सपना के गाँव

(छत्तीसगढ़  की कला, संस्कृति, तीज त्यौहार को रेखांकित करता यह ग्रामवासी  गीत) “मोर सपना के गाँव” ---------------   हाना-हाना मा डोले मोर सपना के गाँव पाना-पाना हा बोले महतारी के नाव ||   • झुनुक झेंगुरा हर गावे फुदुक टेटका मगन आनी-बानी के फूल इहाँ हरियर उपवन बाना-बाना...

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छाए हे गगन मा घटा घनघोर

“छाए हे गगन मा घटा घनघोर” -------------------   छाए हे गगन मा घटा घनघोर नाचत हे झूम-झूम मगन मन मोर आजा गाले ददरिया गोरी बईहाँ जोरी जोर ||   • झिन जाबे गोरी तयं अंधियारी रात मा सावन के बरखा दमोरत हे घाट मा तोर बाली हे उमरिया  लुकाय होही ओसना मा चोर आजा गाले ददरिया गोरी...

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लीम के छईहाँ मा चंदा के बारी मा

(सदाबहार गीत) “लीम के छईहाँ मा चंदा के बारी मा” ----------------   लीम के छईहाँ मा चंदा के बारी मा फुरफुंदी धरे बर आ जाबे ना दाई के अँचरा मा ददा के मया मा फुगड़ी खेले बर आ जाबे ना ||   • अमली के ठौर अउ आमा के मौर मा घाट घटऊंदा अउ चिरगुन के सोर मा परसा के फूल मा रे बरसा...

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मन के कुंदरा मा आजा रे संगवारी

( प्रेमी के आने की बाट  जोहती विरहाकुल नायिका का गीत) “मन के कुंदरा मा आजा रे संगवारी” ----------------    मन के कुंदरा मा आजा संगवारी रे मोर छानी छाबो मया के दूनो बइहाँ ला जोर ||   • मोर आंखी के पुतरी मा बइठे हवस मोर हिरदे के दसना मा ढलंगे  हवस झटकिन आजा तय संगी...

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