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नारी के रूप

नारी के रूप बिटिया रुप लक्ष्मी का, घर आंगन की मान। पिता की राज दुलारी, भाई की अरमान। पत्नी में सावित्री है, बसते पति में प्राण। सदा सलामत रहे पति, मांगे यही वरदान। बहू बनके जो आई, रखी सबका ध्यान। सुबह से भागा दौड़ी, तनिक नहीं आराम। दुनियां जिसमें टिकी है, मां है उसका...

अक्स वही दिखता है आज

अक्स वही दिखता है आज, सिसकियां सुनाई देती है, महलो की दीवारों से। कितनी कलियाँ जल गई, हवस के अंगारों से। रक्त रंजित है इतिहास, शैतानों के अत्याचारों से। किस्से उड़ के आते है, जमीदारों की गलियारों से। दिखाई देतें हैं चेहरे कई, झरोखों से द्वारों से। दास्तां कोई पढ़ा...

सूरज

  सूरज ********* देखो देखो आसमान पर , सूरज निकल आया है। सूरज की किरणों को देखो , सब जगहों पर छाया है। पंछी अपने आवाजो से सारे जग को जगाया है। फूलों की बगिया को देखो मन में खुशियाँ लाया है। चींव चींव करते पंछी सारे आसमान पर आया है। प्रिया देवांगन...

बसंत के गीत

🙏🌹 *गीत बसंती~सार छंद*🌷🙏 ******************************** (सार छंद) बाँध बोरिया बिस्तर अपना, दुबक चला जड़काला। अब बसंत आया अलबेला, दिखता नया निराला। बाग बगीचे कानन झुरमुट, बरबस ही बौराए। यौवन व्यापक यत्र-तत्र तब, राग बसंती गाए। कामदेव युवराज स्वागतम्, स्वीकारो वरमाला।...

मेरा गाँव

    मेरा गाँव  मेरा गाँव है बड़ा सुहाना,  पीपल का है छाँव पुराना। जिसमें बैठे दादा काका,  ताऊ भैया और बाबा ।। तरह तरह की बात बताते,  नया नया किस्सा सुनाते । कभी नही वे लड़ते झगड़ते,  आपस में सब मिलकर रहते ।। सुख दुख में सब देते साथ, देते हैं हाथों में हाथ । चारों...

बचपन का साथी

बचपन का साथी आम का पेड़ दे रहा था छाया द्वारे पर था दुःख सुख का साथी मेरे मेरे हाथों द्वारा पला बढ़ा । डाली पर उसके झूल – झूल बचपन मेरा बीता सुखमय चढ़ उस पर खेले हम लंगड़ी खाते थे मीठे फल उसके । धीरे – धीरे वह आम का वृक्ष फैलाव में ज्यादा जगह लिया उसकी डाली आंगन के बीच...
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