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बढ़े महंगाई

त्रिभंगी छंद बढ़े महंगाई, करे कमाई, जो जमाखोर, लोभ भरे । सरकारी ढर्रा, जाने जर्रा, है सांठ गांठ, साथ खड़े ।। अब कौन हमारे, लोग पुकारे, जो करे रक्षा, हाथ धरे । मंत्री सरकारी, धनी व्यपारी, साथ हमारे, छोड़ खड़े ।। -रमेशकुमार सिंह...

एक गौरैया का प्रश्न

एक मनुज से पूछती, गौरैया ये बोल । बुद्धिमान प्राणी कहो, मेरे जीवन मोल ।। तुम अपने हर प्रगति को, अब तो लो कुछ तोल । धरती के कण-कण मनुज, जहर दिये हो घोल ।। क्या हम कर सकते नहीं, चीं-चीं कल-कल्लोल । तेरे सिंचित विष जहर, करते क्रिया कपोल ।। क्या हम भी इस सृष्टि में, करें...

अपनी कलम की नोक से

अपनी कलम की नोक से, क्षितिज फलक पर, मैंने एक बिंदु उकेरा है । अभी भरने है कई रंग, इस क्षितिज फलक पर, लेखनी को तो अभी हाथ धरा है । डगमगाते पाँव से, अंधेरी डगर पर, चलने का दंभ भरा है । निशा की तम पर ही, चलना है उस पथ पर, जिस पथ पर नई सबेरा है । राही कोई और हो न सही,...

वात्सल्य

चोका .तारें आकश दीनकर प्रकाश धरती रज समुद्र जल निधि ईश्वर दया माप सका है कौन जगत मौन ममता का आंचल गोद में शिशु रक्त दान करती वात्सल्य स्नेह वह -रमेशकुमार सिंह...

बेटी

चोका सभ्यसमाज एक कुशल माली बेटी की पौध रोपते जतन से पल्लवित होकर नन्ही सी पौध अटखेलियां करे गुनगुनाती हुई पुष्पित होती महके चारो ओर करे जतन तोड़े ना कोई चोर जग बगिया बेटी जिसकी शोभा गढ़े गौरव गाथा । -रमेशकुमार सिंह...

देश में भ्रष्टाचार

चोका कौन करे है ? देश में भ्रष्टाचार, हमारे नेता, नेताओं के चम्मच आम जनता शासक अधिकारी सभी कहते हाय तौबा धिक्कार थूक रहे हैं एक दूसरे पर ये जानते ना कोई नही नहीं रे मानते नहीं कोई तुम ही तो हो मै भी उनके साथ बेकार की है बात । -रमेशकुमार सिंह...
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