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चल तिरंगा ल फहराबो

चल तिरंगा ल फ़हराबो चल दीदी ,चल भईया तिरंगा हमन फहरबो। “भारत माता की जय” के नारा हमन लगाबो  ।।   चाचा नेहरू,आऊ गांधी बबा के फोटु मा तिलक लगाबो। भारत देश ल आजाद करे के चरण म माथ नवाबों।।   गांव गली खोर म रैली ल निकलबो  । जगह जगह के बूंदी ल ठोमा...

आज फेर तोर सुरता आगी सुलगावत हे

  आज फेर तोर सुरता आगी सुलगावत हे आज फेर तोर सुरता आगी सुलगावत हे बैरी आंखी ले तरतर आंसू बोहावत हे काबर देखाये तैं सपना मया पिरित के तोर मया ह मोर सुध बुध बिसरावत हे दिन तो बित्तथे जस तस संगी साथी संग रथिया जाग के, आंखी मा पहावत हे पथरा के दुनियां मा, काबर होथे...

मुक्तक

छत्तीसगढ़ी मुक्तक   जीनगी ला जिये के बहाना चाही , रोवत ल गुदगुदा के हंसना चाही । ईहा ले कुछ लेके नी जान संगी .. सब करा हस के गोठियाना चाही।।   ✍️ “लाला ” ☎️...

मोर गांव

छत्तीसगढ़ के पवित्र माटी मा, बसे हे मूरता मोर गांव । जिला बेमेतरा के रहइय्या मै, विक्रमसिंह “लाला” मोर नाव ।।  मोर गांव म हावय सुघर  बर पीपर के छइहां गांव के बाहिर मा बिराजे हे, मोर मावली मइया ।  बीच म हावे ठाकुर देव  आऊ उत्तर म बिराजे शीतला दाई। उत्ती मा...

याद

ओही अंगना,ओहि खिड़की ,ओहि द्वार याद आथे । जब मै अकेला होथव, मोला मोर घर याद आथे ।। जेन हमर करा हे, ओकर कीमत नी समझन । मोर छोटे भाई ले दुरिया के, ओ बहुत याद आथे ।। पेट के खातिर भतकट हो ,मेहा शहर शहर । जब मोर पांव मा काटा गढ़तॆ, मोर दाई याद आथे ।। जेठ के गरमी मा पसीना...

घुमले मेला

अभी घूमले मेला, हावस ते अकेला । हाेहि तोर शादी , नई मिल्ही आजादी । अभी अपन ल भर, दुनिया बर झन मर। सत् कर्म करले, सही राह धरले। बेरा हावय अभी , लहुटय नहीं कभी। पांव तीरे भारी , नई आन दय पारी।। -विक्रम सिंह...
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