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अहीर छंद

-अहीर छंद- धरे एकादश भार । अंत जगण भर डार बनही छंद अहीर । मन मा धारव धीर जइसे- खोलव ज्ञान कपाट । देखव रूप विराट जेखर ओर न छोर । एको मिलय न कोर जेखर आघु पहाड़ । लागत रहय कबाड़ धुर्रा-कण कस जान । जतका दिखय समान जेखर हाथ हजार । लागय नार-बियार कतका पाँव गिनाँव । कतका बुद्धि...

दीप छंद

-दीप छंद- जेन चरणन चार । धरय जब दस भार नगण गुरू लघु अंत । दीप गढ़ बलवंत दीप गुरतुर होय । मन मा सुख समोय ‘गढ़‘  के करब गोठ । हमन जुरमिल पोठ जइसे- सुन लौ सब सुजान । देके अपन कान हे भगवत पुराण । जेखर अपन मान घीव असन लुकाय । कृष्ण रहय समाय जे लेवय बिलोय । अपन मन ल धोय पाहि...

निधि छंद

-निधि छंद- नौ मात्रा कंत । गुरू लघु ले अंत गढ़ अइसे बंद । बनही निधि छंद जइसे- सुन ऊंखर बात । सूतजी अघात सुन लौं मन लाय । गुरू जेन बताय लइकापन आय ।  शुक जंगल जाय ले बर सन्यास । मन भरे उजास देखय जब बाप । सह सकय न ताप शुक-शुक चिल्लाय । बेटा ल बलाय शुक सुनय न बात । अपन धुन...

गंग छंद

-गंग छंद- हे चरण चारे । नौ भार धारे नौ गंग भाखे । गुरू अंत राखे जइसे- मन श्याम राखे । शुक व्यास भाखे सुन एक बेरा । ऋषि करिन डेरा हरि क्षेत्र आके । सब जुरीयाके भगवान पाये । यज्ञे रचाये कर सूत पूजा । विधि कई दूजा सब हाथ जोरे । मन गांठ छोरे शुभ प्रश्न पूछे । मन जेन रूचे...

छबि छंद

-छबि छंद- छबि  ला सवार । आठे मझार चारो समान । छबि के प्रमान जगणे पदांत । चरणे समांत लिखही ‘रमेश‘ । सुमरत गणेश जइसे- हे वेद व्यास । करवँ अरदास मन भर उजास । मोर बड आस लेत प्रभु नाम । करवँ शुरू काम जगत पति श्याम । करय मन धाम देव शुक पाँव । माथे नवाँव महिमा सुनाव ।...

सुगती छंद

-सुगती छंद- चार चरणा । सात गनना अंत करले । बड़े धरले तीन चारे । भार डारे धरव सुमती । रचव सुगती जइसे- श्याम राधे । श्याम राधे मोर भारे । तहीं धारे दया कर के । हाथ धर के संग कर लौ । संग कर लौ चरित तोरे । करय भोरे जगत तारे । पाप हारे नाम तोरे । रूप तोरे तोर दाया । मिटय...
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