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त्रिभंगी छंद

बढ़े महंगाई, करे कमाई, जो जमाखोर, लोभ भरे ।
सरकारी ढर्रा, जाने जर्रा, है सांठ गांठ, साथ खड़े ।।
अब कौन हमारे, लोग पुकारे, जो करे रक्षा, हाथ धरे ।
मंत्री सरकारी, धनी व्यपारी, साथ हमारे, छोड़ खड़े ।।

-रमेशकुमार सिंह चौहान

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