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आज फेर तोर सुरता आगी सुलगावत हे

आज फेर तोर सुरता आगी सुलगावत हे
बैरी आंखी ले तरतर आंसू बोहावत हे

काबर देखाये तैं सपना मया पिरित के
तोर मया ह मोर सुध बुध बिसरावत हे

दिन तो बित्तथे जस तस संगी साथी संग
रथिया जाग के, आंखी मा पहावत हे

पथरा के दुनियां मा, काबर होथे मया संगी
इही सोच के मोर मन, बड़ रीसयावत हे

तैं जहां भी राह, सदा खुस राह मयारू
इही बिनती मन मोर, देंवता ला गोहरावत हे

सत्यधर बान्धे
गंजपारा बेमेतरा
9713093813

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