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आदमी

आदमी होके आदमी पर न घात कर
चल हॅस के हर किसी से बात कर

क्या लेके आए हो, क्या लेके जाओगे
दिल खोल के हर किसी से मुलाक़ात कर

मांगता नहीं कोई तिजोरी किसी का
मोहब्बत का खजाना ख़र्च इफरात कर

रगो का लहू लाल है हर आदमी का
मोहब्बत फैला नफ़रत से न मात कर

मिट्टी का पुतला हैं यहां हर एक आदमी
छोटा-बड़ा सोच के मैला न जज़्बात कर

सत्यधर बान्धे

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