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बेजाकब्जा हा हवय, बड़े समस्या यार ।
येहू एक प्रकार के, आवय भ्रष्चाचार ।।
आवय भ्रष्टाचार, जगह सरकारी घेरब ।
हाट बाट अउ खार, दुवारी मा आँखी फेरब ।।
सुनलव कहय रमेश, सोच के ढिल्ला कब्जा ।
जेलव देखव तेन, करत हे बेजा कब्जा ।।

चारों कोती देश मा, हवय समस्या झार ।
सबो समस्या ले बड़े, बेजाकब्जा यार ।।
बेजाकब्जा यार, समस्या के जड़ आवय ।
परिया-चरिया छेक, झाड़-रुख ला सब काटे ।
नदिया तरिया छेक, धार पानी के पाटे ।।
पर्यावरण बेहाल, ढाँक मुँह करिया धोती ।
साकुर-साकुर देख, गली हे चारों कोती ।

-रमेशकुमार सिह चौहान

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