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कइसे बदलत हे रंग होली तिहार के
दारू ल गटकत हन कुकरा ल मार के

गली गली बोहाये हे, पउवा,अध्धी,बोटल
अब एमा दोस काहे, बउपरा सरकार के

बिहनिया ले बड़, बखानत हे सियनहीन
कालेचुप सुनत हन, रचावर ल बार के

कतेक रचावर, छेना के खरही बरगे
खटिया घलो बारे हन, सोवत ल उतार के

गली म माचे हे हुडदंग, रंग गुलाल संग
पीठ ल भिंगोथन, गरम फुग्गा ल मार के

बेंदरा असन मुंह ल, करथन बड़ करिया
वारनीस के डब्बा ल, मुड़ी म ढ़ार के

कहां नंदागे हमर, परसा के रंग गुलाल
काबर करु होगे मिठास, बतासा के हार के

तभो ले काहत हन, बुरा झन मानव होली हे
चलव तुहू मन चिल्लावव, मुहू ल फार के

सत्यधर बान्धे
गंजपारा बेमेतरा
9713093813

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