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टोकब न भाये

टोकब न भाये (करखा दंडक छंद) काला कहिबे, का अउ कइसे कहिबे, आघू आके, चिन्हउ कहाये । येही डर मा, आँखी-कान ल मूंदे, लोगन कहिथे, टोकब न भाये ।। भले खपत हे, मनखे चारों कोती, बेजा कब्जा, मनभर सकेले । नियम-धियम ला, अपने खुद के इज्जत, धरम-करम ला,...

कर मान बने धरती के

कर मान बने धरती के (खरारी छंद) कर मान बने, धरती के, देश प्रेम ला, निज धर्म बनाये । रख मान बने, धरती के, जइसे खुद ला, सम्मान सुहाये ।। उपहास करे, काबर तैं, अपन देश के, पहिचान भुलाये । जब मान मरे, मनखे के, जिंदा रहिके, वो लाश कहाये ।।...

नारी के रूप

नारी के रूप बिटिया रुप लक्ष्मी का, घर आंगन की मान। पिता की राज दुलारी, भाई की अरमान। पत्नी में सावित्री है, बसते पति में प्राण। सदा सलामत रहे पति, मांगे यही वरदान। बहू बनके जो आई, रखी सबका ध्यान। सुबह से भागा दौड़ी, तनिक नहीं आराम।...

अक्स वही दिखता है आज

अक्स वही दिखता है आज, सिसकियां सुनाई देती है, महलो की दीवारों से। कितनी कलियाँ जल गई, हवस के अंगारों से। रक्त रंजित है इतिहास, शैतानों के अत्याचारों से। किस्से उड़ के आते है, जमीदारों की गलियारों से। दिखाई देतें हैं चेहरे कई, झरोखों से...

छेरछेरा

दान पून के तिहार  --- छेरछेरा  ************************* हमर भारत देश में पूजा पाठ अऊ दान के बहुत महत्व हे। दान करे बर जाति अऊ धरम नइ लागय। हमर भारतीय संस्कृति  में हिन्दू, मुसलिम, सिख, ईसाई, जैन सबो धरम के आदमी मन दान धरम करथे अऊ पुण्य ...

सूरज

  सूरज ********* देखो देखो आसमान पर , सूरज निकल आया है। सूरज की किरणों को देखो , सब जगहों पर छाया है। पंछी अपने आवाजो से सारे जग को जगाया है। फूलों की बगिया को देखो मन में खुशियाँ लाया है। चींव चींव करते पंछी सारे आसमान पर आया है।...

बसंत के गीत

🙏🌹 *गीत बसंती~सार छंद*🌷🙏 ******************************** (सार छंद) बाँध बोरिया बिस्तर अपना, दुबक चला जड़काला। अब बसंत आया अलबेला, दिखता नया निराला। बाग बगीचे कानन झुरमुट, बरबस ही बौराए। यौवन व्यापक यत्र-तत्र तब, राग बसंती गाए। कामदेव...

मेरा गाँव

    मेरा गाँव  मेरा गाँव है बड़ा सुहाना,  पीपल का है छाँव पुराना। जिसमें बैठे दादा काका,  ताऊ भैया और बाबा ।। तरह तरह की बात बताते,  नया नया किस्सा सुनाते । कभी नही वे लड़ते झगड़ते,  आपस में सब मिलकर रहते ।। सुख दुख में सब देते साथ,...

बचपन का साथी

बचपन का साथी आम का पेड़ दे रहा था छाया द्वारे पर था दुःख सुख का साथी मेरे मेरे हाथों द्वारा पला बढ़ा । डाली पर उसके झूल – झूल बचपन मेरा बीता सुखमय चढ़ उस पर खेले हम लंगड़ी खाते थे मीठे फल उसके । धीरे – धीरे वह आम का वृक्ष फैलाव में ज्यादा जगह...

सबो चीज के अपने गुण-धर्म

सबो चीज के अपने गुण-धर्म (कमंद छंद) सबो चीज के अपने गुण धर्म, एक पहिचान ओखरे होथे । कोनो पातर कोनो रोठ, पोठ कोनो हा गुजगुज होथे । कोनो सिठ्ठा कोनो मीठ, करू कानो हा चुरपुर होथे । धरम-करम के येही मर्म, धर्म अपने तो अपने होथे ।। सबो चीज के...

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परिचय-

श्री रमेश कुमार चौहान एक परिचय.

हमारे साहित्यकार

हमारे मार्गदर्शक

धरोहर

पुरखा के रचना हमर थाती

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परिचय- छत्तीसगढ़ी साहित्य मंच

सोशल मिडिया की सहायता से छत्तीसगढ़ी साहित्य को प्रचारित एवं प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से श्री अरूण निगम, के सुझाव एवं श्री संजिव तिवारी के मार्गदर्शन में श्री रमेश चौहान द्वारा 7 अगस्त 2013 को “छत्तीसगढ़ी मंच” की स्थापना की गई। इस मंच का स्लोगन रखा गया –“छत्तीसगढ़ी पढ़े बर, छत्तीसगढ़ी गढ़े बर”।

इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु फेसबुक में “छत्तीसगढ़ी साहित्य मंच से छत्तीसगढ़ी कविता का प्रतियोगिता “पागा” के 7 सप्ताहिक आयोजन एवं “पागा’कलगी” के 35 पाक्षिक आयोजन किया गया। इसे अच्छा प्रतिसाद भी मिला इसके सफलता से प्रभावित होकर कुछ मित्र हिन्दी कविताओं के लिये भी प्रतियोगिता की मांग उठाने लगे जिसके प्रतिपूर्ति “साहित्य श्री” से किया गया।

इस प्रतियोगिता के अलग-अलग अंक में छत्तीसगढ़ के अलग-अलग वरिष्ठ विद्वान अपने आर्शीरवाद दिये। इस मंच में निर्णायक के रूप में सर्वश्री मुकुंद कौशल, श्रीरामेश्वर शर्मा, श्रीमती शकुंतला तरार, श्रीमती शकुंतला शर्मा, श्रीमती सुधा वर्मा, श्रीमती हंसा शुक्ला, प्रो चंद्रशेखर सिंह, श्री नंदकुमार निशांत, श्री राजकमल राजपूत, अंजनी कुमार अंकुर, डॉ जे आर सोनी जैसे महान विभूतियां अपने बहुमूल्य समय दियें है, इसके लिये छत्तीसगढ़ साहित्यमंच इन मनिषियों के प्रति सदा आभारी रहेगी।

इस प्रतियोगिता के संचालक मण्डल में मार्गदर्शक – श्रीअरूण निगम, श्रीसंजीव तिवारी, श्रीचंद्रशेखर सिंह, श्रीराजकमल राजपूत, श्रीनंदराम निशांत।

प्रबंधन सहायक – श्रीसूर्यकांत गुप्ता, श्रीसुनिल शर्मा, श्रीमिलन मलहरिया, श्रीमतीआशा देशमुख
मिडिया प्रभरी – श्रीदेवहीरा लहरी, लक्ष्मीनारायण लहरे
मुख्या प्रबंधक – रमेश कुमार चौहान हैं।

‘‘सुरता‘‘ पर आपका हार्दिक अभिनंदन है ।

अभिनंदन है मान्यवर, आप यहां जो आय ।
मन अति हर्षित हुआ, साथ आपका पाय ।। 

हार्दिक अभिनंदन

अभिनंदन है मान्यवर, आप यहां जो आय । “सुरता” के इस ठौर पर, पल जो आप बिताय ।।

“सुरता” पर आपका हार्दिक अभिनंदन है । मन में कुछ करने की अभिलाषा आपके आने से अधिक बलवती हुई है। आपके साहित्य के प्रति अनुराग, नवसाहित्य सृजन का कारक होगा। “सुरता” का अर्थ छत्तीसगढ़ी में स्मरण करना अथवा याद करना होता है। भारत के समृद्धशाली गौरवमयी ग्रामीण संस्कृति को संरक्षित करने, वेदों से निसृत एवं हिन्दी काव्य के स्वर्ण युग में स्थापित काव्य शिल्प छंद को पुर्नस्थापित करने, भूले-बिसरे साहित्यकारों को संग्रहित करने का प्रयास है अस्तु-“सुरता”।  ‘”सुरता” को स्थापित करने का एक मात्र उद्देश्य साहित्य को समृद्ध बनाने में प्रयास करना है। विशेष कर छत्तीसगढ़ी साहित्य को विश्वपटल पर उकेरने की अभिलाषा है। “सुरता साहित्य के धरोहर” को अपने नाम के अनुरूप हिन्दी छत्तीसगढ़ी रचनाओं का “साहित्य के कोठी” अर्थात संग्रह केन्द्र के रूप में स्थापित करने की उत्कंठ अभिलाषा है।

“छत्तीसगढ़ी साहित्य मंच” के माध्यम से हिन्दी कविताओं के लिये “साहित्य श्री” एवं छत्तीसगढ़ी कविताओं के लिये “छत्तीसगढ़ के पागा-कलगी” नाम से प्रतियोगिता आयोजित किया जाता था जिसके निर्णायक छत्तीसगढ़ के प्रबुद्ध एवं स्थापित साहित्यकार रहे है, को इसी रूप में संरक्षित रखते हुये इसी ब्लॉग में आगे साहित्य के पुरोधा एवं नवांकुर साहित्यकारों को स्थान दिया जाता रहेगा।

मैंने अपनी स्वरचित रचनाओं को विभिन्न ब्लॉगों में विभक्त करते हुये “सुरता” में छत्तीसगढ़ी रचनायें, “छंद के रंग” में छत्तीसगढ़ी भाषा में छंद विधायें, “नवाकार” में हिन्दी रचनायें, “उपासना” में धार्मिक रचनायें, “कहानी-किस्सा” में हिन्दी छत्तीसगढ़ी कहानियां, “आलेख” में विभिन्न विषयों पर हिन्दी आलेख, ‘”छत्तीसगढ़ी आलेख” में छत्तीसगढ़ी भाषा पर विभिन्न विषयों पर आलेख, सतत् संग्रहित कर रहा हॅू।

आप यदि साहित्य में रूचि लेते हैं, छत्तीसगढ़ के ऐसे साहित्यकार से परिचित है जिनकी रचनाएं प्रकाश में नहीं आ पाए हों तो उनकी रचनाओं को हमें प्रेषित कीजिये ।हम उसे ससम्मान यहां प्रकाशित करेंगे ।  आप स्वयं एक रचनाकार हैं तो आपका यहां हार्दिक स्वागत है आप यहां अपनी हिन्दी रचनाओं को “साहित्य श्री” एवं छत्तीसगढी़ रचनाओं को “छत्तीसगढ़ के पागा-कलगी” में पोष्ट कर सकते हैं । चाहे आपकी रचना गद्य, पद्य की किसी भी विधा में हो ।

आपका

– रमेशकुमार सिंह चौहान

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रमेशकुमार सिंह चौहान

प्रधान संपादक, सुरता

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पं. छत्रधर शर्मा

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